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Kalam

Kalam is a Hindi language news masthead for Australia, covering India, Australian public life and migrant families. Launching soon.

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About Kalam

बुज़ुर्ग माता-पिता को बुलाने की कतार सालों लंबी है। कलम इस कतार के भीतर से रिपोर्ट करता है: आवेदन का ख़र्च, बीमा की शर्तें, बार-बार आगे खिसकती तारीख़ें, और वह बोझ जो बेटे-बहू के कंधों पर चुपचाप आ बैठता है।

डॉलर और रुपये के बीच का फ़र्क़ हर महीने हज़ारों घरों का बजट तय करता है। कलम बताता है कि रकम भेजने का वक़्त कैसे चुनें, बैंक और ऐप की फ़ीस में असली अंतर कहाँ छिपा रहता है, और भारत में उस पैसे पर कौन से नियम लागू होते हैं।

इंजीनियर, नर्स, अध्यापक और अकाउंटेंट, हर पेशे में मान्यता का रास्ता अलग है। कलम हर रास्ते की प्रक्रिया, लगने वाला समय और वे आम चूकें दर्ज करता है जिनकी वजह से आवेदन महीनों लटका रह जाता है।

मकान मालिक की चुप्पी और एजेंट की जल्दबाज़ी के बीच नया किराएदार अक्सर अपने ही हक़ भूल जाता है। (or: अपने ही करार की शर्तें भूल जाता है।) कलम बताता है कि निरीक्षण की रिपोर्ट क्यों संभालकर रखनी चाहिए, बॉन्ड लौटाने का विवाद कहाँ ले जाया जाता है, और किराया बढ़ाने की सूचना पर नियम क्या कहते हैं।

दाल, प्याज़ और खाने के तेल के दाम बारिश के साथ चलते हैं। कलम खेत से मंडी और मंडी से रसोई तक की कड़ी जोड़ता है, और देखता है कि सरकारी भंडार, आयात और जमाखोरी के फ़ैसले किस मोड़ पर दाम थामते हैं।

वितरक, सबटाइटल, त्योहारों के शो और समुदाय के छोटे प्रदर्शन, इन सबसे गुज़रकर ही कोई फ़िल्म यहाँ के दर्शक तक पहुँचती है। कलम इस पूरे रास्ते की पड़ताल करता है और पूछता है कि यह चुनाव आख़िर करता कौन है।

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